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सुख समृद्धि प्रदान करने वाले श्री शिवेश्वर महादेव (37/84)

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ताछिवम शाश्वतं स्थानं दत्तं देवी तदा मया।
मार्कण्डेयेश्वरादुत्तरे वर तस्माय वर्णिनी। ।

परिचय:
श्री शिवेश्वर महादेव की स्थापना की कथा शिव माहात्म्य का वर्णन करती है। नित प्रतिदिन शिव आराधना करके राजा रिपुंजय की रानी बहुला देवी को सुख समृद्धि की प्राप्ति हुई थी।

पौराणिक आधार एवं महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में महाकाल वन में रिपुंजय नाम के राजा थे। वे प्रतापी तथा प्रजापालक थे और वेद वेदांत में पारंगत थे। उनके राज में उनकी प्रजा अत्यंत सुखी थी। उनके प्रताप से महाकाल वन में इतनी समृद्धि थी कि वहां शिव पूजन बंद हो गया। तब भगवान ने श्री गणेश को बुला कर कहा कि वे महाकाल वन जाएं और वहाँ राजा रिपुंजय का प्रभाव देखें। उनके आदेशानुसार श्री गणेशजी एक वैद्य का रूप धारण कर महाकाल वन पहुँचे। वहां पहुँच कर उन्होंने अपनी औषधियों के माध्यम से सम्पूर्ण बीमारियों के इलाज करने की बात कही। उनकी बातें सुन राज्य के कई वृद्ध, स्त्रियां तथा बच्चे उनके पास अपनी व्याधियों के हल हेतु जाने लगे और स्वस्थ होने लगे। इसी प्रकार उन्हें वहाँ रहते हुए 14 वर्ष हो गए।

राजा रिपुंजय की रानी बहुला देवी को संतान नहीं थी और उन्होंने उन वैद्य रूपी गणेश की प्रशंसा सुनी कि उनके द्वारा दी गई औषधियों से कई लोगों को संतान सुख प्राप्त हुआ है। तब रानी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से अपनी दासी सुनंदा को उस वैद्य को बुलाने भेजा। दासी सुनंदा के आग्रह पर वैद्य रूपी गणेश ने कहा कि वे राजा की आज्ञा के बिना अन्तःपुर में नहीं आ सकते हैं। दासी ने यह बात आकर रानी से कही। रानी के उदास होने पर दासी ने कहा कि आप बीमार होने का बहाना करें, इस पर राजा वैद्य को राज्य में आने की आज्ञा दे देंगे। रानी ने दासी की बात मान कर अस्वस्थता धारण कर ली। रानी को अनुत्साही पाकर राजा ने रानी से दुखी होने का कारण पूछा। तब रानी ने अपनी पुत्र प्राप्ति की इच्छा और वैद्य द्वारा कई लोगों को संतान सुख की प्राप्ति के बारे में बताया। रानी के अनुनय-विनय, आग्रह करने पर राजा रानी को साथ ले वैद्य रूपी श्री गणेश के पास पहुंचे। उन्हें देखते ही वैद्य शिवलिंग में परिवर्तित हो गए। राजा को महान आश्चर्य हुआ। तब उन्होंने उस लिंग का निष्ठापूर्वक पूजन अर्चन किया। वे नित उस दिव्य लिंग का पूजन अर्चन करने लगे जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ। तत्पश्चात स्वयं भगवान शिव वहां पधारे और तभी से वह लिंग शिवेश्वर कहलाया।

दर्शन लाभ:
मान्यतानुसार यहाँ दर्शन करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। यहाँ दर्शन साल भर में कभी भी किये जा सकते हैं लेकिन श्रवण मास में दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है।

कहाँ स्थित है?
उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री शिवेश्वर महादेव का मंदिर अंकपात क्षेत्र में राम जनार्दन मंदिर की बावड़ी पर स्थित है।

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