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रोगों से मुक्त करने वाले श्री लुम्पेश्वर महादेव (41/84)

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चत्वारिशनत्तम सैक्मीश्वरम् विद्धि पार्वती।
लुम्पेश्वर मिति ख्यातं नाम यस्य महीतले। ।

परिचय
श्री लुम्पेश्वर महादेव की पौराणिक कथा शिव उपासना का माहात्म्य दर्शाती है। राजा लुम्प का कुष्ठ रोग महाकाल वन में स्थित दिव्य लिंग के पूजन से ही दूर हुआ।

पौराणिक आधार एवं महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में लुम्प नामक तपस्वी राजा थे। उनकी विशाला नामक अति सुन्दर रानी थी। एक बार राजा लुम्प को कुछ ब्राह्मणों ने सलाह दी कि आप समग नाम के ब्राह्मण से युद्ध करें। ब्राह्मणों के कहेअनुसार राजा म्लेच्छ गणों, तुषार, बर्बर व अन्य लोगों को लेकर समग मुनि के आश्रम पर पहुंचे। समग मुनि ने राजा के आगमन पर मधुपर्क आदि से आदर सत्कार किया। राजा ने वहां मुनि से उनकी कामधेनु गाय मांगी जिसे देने से मुनि ने इंकार कर दिया। तब राजा ने बलपूर्वक गाय का हरण कर लिया और मुनि के उस आश्रम को नष्ट कर दिया। राजा के वश में कामधेनु गाय विलाप करने लगी जिससे दुखी हो मुनि राजा से कहने लगे कि ऐसा दुस्साहस ना करो। तब राजा ने अपने तीक्ष्ण बाणों से मुनि का वध कर दिया।

कुछ समय बाद समग मुनि का पुत्र समिधा आश्रम में आया और पिता को मृत देख विलाप करने लगा। उसने पिता का दाह संस्कार किया एवं विचार किया कि वह दुष्ट कौन है जो यद्ध में प्रतिकार न करने वाले कमजोर मुनि का वध करता है। उसी क्षण उसने हाथ में जल लेकर कहा कि मेरे पिता को मारने वाले को कुष्ठ रोग हो जाये। उसी समय राजा कोढ़ से ग्रसित हो गए। कुष्ठ रोग से पीड़ित राजा अत्याधिक पीड़ा से गुजरे। कई तरह की औषधियों के बाद भी जब उन्हें कोई राहत ना मिली तो मरने की इच्छा से वे लकड़ियाँ इकट्ठी करने लगे। वे अपनी चिता बना रहे थे तभी वहां नारद मुनि पहुंचे। तब राजा ने नारद मुनि को प्रणाम कर उनसे पूछा कि उन्हें यह असाध्य कुष्ठ रोग कैसे हो गया? प्रत्युत्तर में नारद मुनि ने राजा को समग ब्राह्मण के पुत्र के शाप के बारे में बताया। राजा के द्वारा शाप के उपाय के बारे में पूछने पर नारदजी ने बताया कि महाकाल वन में एक दिव्य लिंग है। उसके पूजन से आपका कुष्ठ रोग दूर हो जाएगा और आप शाप से मुक्त हो जाओगे। नारद मुनि के बताये अनुसार राजा लुम्प महाकाल वन पहुंचे और क्षिप्रा स्नान कर नारद मुनि द्वारा बताये गए लिंग की उपासना की जिसके फलस्वरूप वे कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए एवं उनका ब्रह्म हत्या दोष समाप्त हुआ। राजा लुम्प के द्वारा पूजित होने के कारण यह लुम्पेश्वर कहलाया।

दर्शन लाभ
मान्यतानुसार श्री लुम्पेश्वर महादेव के दर्शन करने से ब्रह्म ह्त्या दोष दूर होता है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ दर्शन करने से कुष्ठ रोग दूर हो जाता है।

कहाँ स्थित है?
उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री लुम्पेश्वर महादेव का मंदिर भैरवगढ़ क्षेत्र में खेड़ापति हनुमान के पास स्थित है।

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