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ग्रहों के सेनापति मंगल की जन्मस्थली, श्री मंगलनाथ मंदिर उज्जैन

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परिचय:
उज्जयिनी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री मंगलेश्वर मंगलनाथ के बारे में यह जनकथा प्रचलित है कि मंगल ग्रह की उत्पत्ति यहीं से हुई थी। पुराणों के अनुसार उज्जैन नगरी को मंगल की जननी कहा जाता है। देश-विदेश से कई लोग जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है या जिनका मंगल भारी होता है, अपने मंगल दोष निवारण के लिए यहाँ मंगलनाथ भगवान के शिवरूपी लिंग का पूजन-अर्चन करने आते हैं।

पौराणिक आधार एवं महत्व:
मंगल गृह की उत्पत्ति का वृत्तांत स्कन्द पुराण के अवंतिका खंड में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय में उज्जैन में अंधकासुर नाम का प्रसिद्ध दैत्य रहता था। उसके बलशाली पुत्र का नाम कनकदानव था। एक बार कनकदानव ने देवताओं के स्वामी इंद्र को युद्ध के लिए ललकारा। क्रोधित हो इंद्र ने युद्ध में उसका वध कर दिया। कनकदानव का वध कर इंद्र अंधकासुर से भयभीत हो भगवान शंकर की शरण में कैलाश पर्वत की ओर चले गए। वहाँ इंद्र ने भगवान शंकर को अपने भय के बारे में बताया और अनुरोध कर रक्षा मांगी। भगवान शिव ने इंद्र को आश्वस्त किया और अंधकासुर को युद्ध के लिए ललकारा। तब भगवान शिव और अंधकासुर के बीच भीषण संग्राम हुआ। युद्ध के दौरान भगवान शिव के पसीने की एक बूँद पृथ्वी पर गिरी। उससे अंगारे के समान लाल रंग और लाल अंग वाले भूमि पुत्र मंगल उत्पन्न हुए। तब स्वयं शिवजी ने ब्रम्हाजी के साथ मिलकर उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए दही और भात से अभिषेक किया। यही विधान आज भी मंगलनाथ मंदिर में मंगल के अरिष्ट से बचने के लिए देश-विदेश के कई श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है।

बाद में अंगारक, रक्ताक्ष तथा महादेव पुत्र, इन नामों से स्तुति कर ब्राह्मणों ने उन्हें ग्रहों के मध्य में प्रतिष्ठित किया। फिर उसी स्थान पर ब्रम्हाजी ने मंगलेश्वर नामक उत्तम शिवलिंग की स्थापना की जो आज विश्व में मंगलनाथ, उज्जैन के नाम से प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर ने ही मंगल देव को ग्रहों का सेनापति नियुक्त किया और अवंतिका में निवास कर लोगों का मंगल करने का अनुरोध किया।

ज्योतिषीय महत्व एवं मंगल दोष निवारण उपाय:
ज्योतिषियों के अनुसार मृगशीश, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्रों का स्वामित्व मंगल को ही प्राप्त है। कर्क एवं सिंह लग्न की कुंडली में ये विशेष कारक माने जाते हैं। इसके अलावा मिथुन तथा कन्या लग्न की कुंडली में भी यह विशेष कारक माने जाते हैं। मंगल ग्रह की क्रुद्धता के कारण ही वर-वधु की कुंडली में मंगल का मिलान आवश्यक माना गया है।

ज्योतिषीय महत्वानुसार मंगल ग्रह की शान्ति के लिए शिव उपासना तथा मूंगा रत्न धारण करने का विधान है। मंगल दोष निवारण के लिए सरल व अचूक उपाय है मंगल ग्रह की भात पुजा। भात पुजा करने के लिए भगवान मंगल देव को दहीं, दुध, घी, शहद, शक्कर, अश्वगंध एवं भांग से स्नान करवाया जाता है और मंगल स्त्रोत का पाठ किया जाता है। उसके बाद पके हुए चावल को ठंडा करके उसमें पंचामृत मिला कर मंगलेश्वर शिवलिंग को चढ़ाया जाता है। भात पूजन पुरे साल के बारह मास में कभी भी सुबह ६ बजे से दोपहर ३ बजे तक करवाया जा सकता है। मान्यतानुसार इस पूजन से मंगल देव को शीतलता मिलती है और मंगल दोष का निवारण होता है।

मंदिर संरचना एवं इतिहास:
मंगलनाथ मंदिर विश्व के अति प्राचीन स्थानों में से एक है। मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा काल में हुआ था। मंगलनाथ मंदिर में मंगल देव के अलावा भुवनेश्वरी माता, श्री गणेशजी, दक्षिणमुखी हनुमानजी, सौभाग्येश्वरी देवीजी और पंचमुखी महादेव का मंदिर भी स्थित है।

कैसे पहुंचा जाये?
मंगलनाथ पहुँचने के लिए निजी वाहन के अलावा टैक्सी सेवाएं भी उपलब्ध है। इसके साथ ही उज्जैन दर्शन बस द्वारा भी मंगलनाथ दर्शन के लिए आया जा सकता है।

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