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प्रतिष्ठा प्रदान करने वाले श्री कुंडेश्वर महादेव (40/84)

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चत्वारिंशत्तमम् विद्दी कुंडेश्वर मतः श्रृणु।
यस्य दर्शन मात्रेण लभ्यते सद्गतिः परा। ।

परिचय
श्री कुंडेश्वर महादेव की कथा शिव तपस्या का माहात्म्य दर्शाती है। शिव की तपस्या से ही शिवगण कुंड को शाप से मुक्ति मिली एवं पुनः गणों के स्वामी का पद प्राप्त हुआ।

पौराणिक आधार एवं महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने शिवजी से पूछा कि उनका पुत्र वीरक कहाँ है? वे उसे देखना चाहती हैं। प्रत्युत्तर में शिवजी बोले कि वह महाकाल वन में जल में खड़ा होकर कठोर तप कर रहा है। तब उसे देखने के लिए भगवान शंकर और माता पार्वती अपने गणों के साथ नंदी पर सवार हो महाकाल वन की ओर बढे। गणों में गणों का स्वामी कुंड भी मौजूद था। मार्ग में नंदी की तेज गति से माता पार्वती भयभीत होने लगीं इसलिए शिवजी ने नंदी को रोक दिया। तब शिवजी बोले – आप कुछ देर विश्राम कीजिये, मैं आगे बढ़ने के लिए सरल मार्ग देख कर आता हूँ। तब तक यह गणों का स्वामी कुंड आपके पास रहेगा और आपकी आज्ञा का पालन करेगा।

यह कह कर शिवजी नंदी पर बैठ कर चले गए। उन्हें गए दस वर्ष बीत गए। तब माँ पार्वती ने व्यथित हो कुंड से कहा कि इतना समय हो गया शिवजी कहाँ चले गए। तब कुंड ने कहा कि माता, प्रभु जल्दी ही आ जायेंगे। माँ पार्वती ने फिर कहा कि तुम मुझे भगवान के दर्शन कराओ। माँ पार्वती के बार-बार कहने पर भी जब गणों का स्वामी कुंड भगवान शंकर को नहीं ढूंढ़ सका तब माता पार्वती ने क्रोधित हो उसे पृथ्वी लोक में दंड भुगतने का शाप दे दिया। तभी वहां शिवजी पहुंचे और उन्हें सारा वृत्तांत मालूम हुआ। शिवजी को वहां देख कुंड अनुनय विनय करने लगा। तब शिवजी बोले – कुंड, तुम महाकाल वन जाओ। वहाँ कालभैरव के सामने स्थित दिव्य लिंग का पूजन अर्चन करो। उस लिंग के प्रताप से तुम्हें पुनः गण पद प्राप्त होगा। शिवजी की बात सुन कर कुंड महाकाल वन पहुंचा और शिवजी द्वारा बताये दिव्य लिंग के सम्मुख तपस्या करने लगा। उसकी तपस्या से भगवान शिव प्रसंन्न हुए एवं उसे अक्षय पद पाने का वरदान दिया। शिव के वरदान से कुंड पुनः गणों का स्वामी कहलाया।

दर्शन लाभ
मान्यतानुसार श्री कुंडेश्वर महादेव के दर्शन करने से प्रतिष्ठित पद की प्राप्ति होती है।

कहाँ स्थित है?
उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री कुंडेश्वर महादेव का मंदिर अंकपात मार्ग पर सांदीपनि आश्रम में स्थित है।

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