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दोषों को दूर कर विजयश्री प्रदान करने वाले श्री इंद्रेश्वर महादेव (35/84)

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महाकाल वने रम्ये खण्डेश्वरस्य दक्षिणे।
सर्वसम्पत्करम् लिंगम विद्यते तत्र वासव। ।

परिचय
श्री इंद्रेश्वर महादेव की कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का महिमामंडन करती है। प्रस्तुत पौराणिक कथा के अनुसार यह शिवलिंग स्वयं इंद्र द्वारा पूजा गया है।

पौराणिक आधार एवं महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में त्वष्ट नाम के प्रजापति थे। उनका एक पुत्र था जिसका नाम कुशध्वज था। एक बार देवराज इंद्र से कुशध्वज का झगड़ा हो गया जिसके फलस्वरूप इंद्र ने कुशध्वज का वध कर दिया। अपने पुत्र की मृत्यु को देख प्रजापति त्वष्ट काफी दुखी एवं क्रोधित हुए। क्रोधस्वरूप उन्होंने अपनी जटा में से एक बाल निकाला और उसे अग्नि में झोंक दिया। फिर अग्नि में से एक ज्वाला उत्पन्न हुई जिसमें से वृत्रासुर नाम का एक अतिबलिष्ट दैत्य उत्पन्न हुआ। शक्तियों से युक्त वृत्रासुर ने देवलोक में अपना आधिपत्य जमाना शुरू कर दिया। उसके बढ़ते प्रभुत्व के फलस्वरूप इंद्र भयभीत हो चिंता करने लगे। तभी वहाँ वृत्रासुर आ गया। इंद्र और वृत्रासुर में भयंकर संग्राम हुआ। शक्तिशाली वृत्रासुर के सामने देवताओं की शक्ति क्षीण हो गई जिसके फलस्वरूप इंद्र समेत कई देवताओं को वृत्रासुर ने वश में कर लिया।

वृत्रासुर को वश में देख देवगुरु बृहस्पति इंद्र के पास पहुँचे और उन्हें बंधनमुक्त किया। उन्होंने इंद्र से कहा कि अभी आपका समय अनुकूल नहीं है। इस समय आप कोई भी युद्ध नहीं जीत सकते हैं। इंद्र ने देवगुरु से कहा – गुरुवर, कृपया कोई उपाय बताएं जिससे इस गंभीर समस्या का निवारण हो। तब देवगुरु बोले कि आप कृपया करके महाकाल वन जाइये। वहां खंडेश्वर के दक्षिण में एक दिव्य लिंग है उसकी आराधना कीजिये। देवगुरु की बात सुन इंद्र महाकाल वन पहुँचे और वहां देवगुरु बृहस्पति के बताये हुए दिव्य लिंग के समक्ष बैठ स्तुति करने लगे। उनकी तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और वरदान स्वरुप उन्होंने अपना तेज इंद्र को दिया और उन्हें वृत्रासुर से लड़ने के लिए भेजा। भगवान शिव द्वारा मिले वरदान से इंद्र ने वृत्रासुर को परास्त कर उसका वध किया। भगवान शिव की कृपा से देवताओं को फिर से अपना स्थान प्राप्त हुआ। स्वयं इंद्र द्वारा पूजे जाने के कारण यह दिव्य लिंग इंद्रेश्वर कहलाया।

दर्शन लाभ
मान्यतानुसार श्री इंद्रेश्वर महादेव के दर्शन करने से पाप नष्ट हो विजयश्री की प्राप्ति होती है।

कहाँ स्थित है?
उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री इंद्रेश्वर महादेव का मंदिर अनंतपीठ में बोहरा कॉलोनी के द्वार पर स्थित है।

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