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दोषों को दूर कर मोक्ष प्रदान करने वाले श्री कर्कटेश्वर महादेव (२२/८४)

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कार्कटियोनि मुक्तस्य प्राप्तं स्वर्गं सुखं यतः।
कर्कटेश्वर नामायमतो लोके भविष्यति। ।

परिचय:
श्री कर्कटेश्वर महादेव की स्थापना की कहानी राजा धर्ममूर्ति और पिछले जन्म में उनकी केकड़ा योनि से स्वर्ग प्राप्ति की महिमा से जुडी हुई है। प्रस्तुत कथा में सुकर्म एवं शिवालय का माहात्म्य दर्शाया गया है।

पौराणिक आधार एवं महत्व:
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में धर्ममूर्ति नामक एक प्रतापी राजा थे। देवराज इंद्र की सहायता से उन्होंने सैकड़ों दैत्यों का संहार किया। वह तेजस्वी राजा इच्छानुसार अपना शरीर बनाने में सक्षम थे एवं सदा युद्ध में विजयी होते थे जिससे उनकी कीर्ति समस्त दिशाओं में फैली हुई थी। उनकी पत्नी भानुमति थी जो उनकी दस हज़ार रानियों में श्रेष्ठ थी और जो सदैव धर्म परायण रहती थी। पूर्ण वैभव, कीर्ति और सुख से सुसज्जित राजा ने एक बार अपने महर्षि वशिष्ठ से पूछा कि मुझे कीर्ति व उत्तम लक्ष्मी स्त्री किस कृपा से, किस पुण्य से प्राप्त हुई है।

प्रत्युत्तर में वशिष्ठ मुनि बोले की पहले पूर्वजन्म में आप शुद्र राजा थे और कई दोषों से युक्त थे। आपकी यह स्त्री भी दुष्ट स्वभाव वाली थी। जब आपने शरीर त्यागा तब आप नरक में गए जहाँ कई यातनाएं आपको सहनी पड़ीं। वहां अनेक यातनाओं के बाद आपको यमराज ने केकड़े के रूप में जन्म दिया और आप महाकाल वन के रुद्रसागर में रहने लगे। महाकाल वन स्थित रुद्रसागर में जो मनुष्य दान, जप, तप आदि करता है वो अक्षय पुण्य को प्राप्त होता है। पांच वर्ष तक आप उसमें रहे फिर आप जब बाहर निकले तब एक कौआ आपको अपनी चोंच में भरकर आसमान में उड़ने लगा। तब आपने अपने पैरों से कौवे से बचने के लिए प्रहार किये जिसके फलस्वरूप आप उसकी चोंच से छूट गए। कौवे की चोंच से छूट आप स्वर्गद्वारेश्वर के पूर्व में स्थित एक दिव्य लिंग के पास गिरे और गिरते ही उस दिव्य लिंग के प्रभाव से आपने केकड़े का देह त्याग दिव्य विद्याधर के समान देह प्राप्त की। फिर जब आप अन्य शिवगणों के साथ शामिल हो स्वर्ग की ओर जा रहे थे तभी मार्ग में देवताओं ने शिवगणों से आपके बारे में पूछा। तब उन शिवगणों ने शिव लिंग के प्रभाव से आपके केकड़ा योनि से मुक्त होने के बारे में बताया तभी से इस दिव्य लिंग का नाम कर्कटेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्द हुआ। इसी लिंग के माहात्म्य के कारण ही आपको पहले स्वर्ग की और फिर राज की प्राप्ति हुई है। महर्षि की बातें सुनकर राजा तुरंत महाकाल वन स्थित स्वर्गद्वारेश्वर के पूर्व में स्थित शिवालय पहुंचे और वहां ध्यानमग्न हो गए।

दर्शन लाभ:
मान्यतानुसार जो भी श्रद्धालु श्री कर्कटेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं उनके योनि दोष दूर होते हैं एवं वे शिवलोक को प्राप्त करते हैं। यहाँ दर्शन बारह मास में कभी भी किये जा सकते हैं लेकिन अष्टमी और चतुर्दशी के दिन दर्शन का विशेष महत्व माना गया है।

कहाँ स्थित है?
उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री कर्कटेश्वर महादेव का मंदिर खटिकवाड़ा में स्थित है। यहाँ आने के लिए निजी वाहन के अलावा सिटी बस का भी विकल्प है।

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